हीट वेव, शहरी जलवायु तनाव और अनुकूलन आधारित नियोजन
भारत में बढ़ती हीट वेव्स और शहरी जलवायु तनाव सार्वजनिक स्वास्थ्य, ऊर्जा मांग और शहरी जीवन की गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा हैं। इनसे निपटने के लिए अनुकूलन आधारित नियोजन (Adaptive Planning) आवश्यक है, जिसमें हीट एक्शन प्लान, शहरी हरित क्षेत्र, जलवायु-संवेदनशील भवन डिज़ाइन और भू-स्थानिक डेटा आधारित निगरानी शामिल हैं।
- शहरी जलवायु तनाव शहरों में वैश्विक तापन और शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) के संयोजन से बढ़ता है।
- भारत अत्यधिक गर्मी के प्रति सबसे अधिक उजागर और सुभेद्य (vulnerable) देशों में से एक है।
हीट वेव्स के मापदंड
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) गंभीर मौसम घटनाओं की ....
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- 18 जैव विविधता हॉटस्पॉट एवं बायोस्फीयर रिज़र्व
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- 21 औद्योगिक कॉरीडोर – DMIC, ईस्ट कोस्ट कॉरीडोर और गति शक्ति
- 22 लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मोडल अवसंरचना
- 23 तटीय और ब्लू इकोनॉमी
- 24 बंदरगाह-आधारित विकास
- 25 कृषि संक्रमण – फसल विविधीकरण, कृषि-जलवायु क्षेत्रीयकरण, प्राकृतिक कृषि
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- 27 पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र एवं भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण
- 28 मरुस्थलीकरण एवं भूमि निम्नीकरण
- 29 आर्द्रभूमि, रामसर स्थल एवं अंतर्देशीय जलीय रूपांतरण
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- 32 मानसून परिवर्तनशीलता एवं ENSO-IOD प्रतिरूप
- 33 जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ: बदलती प्रकृति और जलवायु प्रभाव
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