भारतीय उपमहाद्वीप का भू-गर्भिक विकास
भारत का भूगर्भीय इतिहास 3.2 अरब वर्षों से भी अधिक पुराना है। प्राचीन क्रेटॉन से लेकर आज की सक्रिय पर्वतनिर्माण प्रक्रियाओं तक, इसकी वर्तमान आकृति महाखण्ड चक्रों, प्लेटों की गति, महाद्वीपीय टकराव और उसके बाद हुए अपरदन–अवसादन प्रक्रियाओं का परिणाम है। इस विकास क्रम को समझना भारत के पर्यावरण व अर्थव्यवस्था को समझने की कुंजी है।
विकास के चरण
प्रीकैम्ब्रियन आधार – भारतीय शील्ड
- प्राचीन क्रेटॉन: धारवाड़, बुंदेलखंड, सिंहभूम, अरावली; ये स्थिर प्रायद्वीपीय शील्ड का निर्माण करते हैं।
- ये मुख्यतः ग्नाइस, शिस्ट, ग्रीनस्टोन से बने हैं, जिनमें लौह, मैंगनीज़, सोना और अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।
- अत्यंत प्राचीन ....
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