परिहार के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
`18 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि जब कोई दोषी समयपूर्व रिहाई (Premature Release) के लिए पात्र हो जाता है, तो संबंधित सरकार को इस पर स्वतः विचार करना चाहिए। इसके लिए दोषी या उसके परिजनों द्वारा सजा के ‘परिहार’ (Remission) के लिए आवेदन की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है।
- यह वाद सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतःसंज्ञान से लिया था।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के प्रमुख दिशा-निर्देश
- सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि जिन राज्यों के पास CrPC की धारा या BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 473के तहत सजा के परिहार से संबंधित कोई ....
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