यौन उत्पीड़न का मामला समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता
7 नवंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी पक्षों के बीच समझौता होने की स्थिति में यौन उत्पीड़न का मामला बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे अपराधों का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
- शीर्ष अदालत द्वारा यह टिप्पणी राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज करते हुए की गई, जिसमें राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में एक स्कूल में 16 वर्षीय लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द कर दिया गया था।
- न्यायमूर्ति सी.टी. रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने संबंधित प्राथमिकी और आगे ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 लिव-इन संबंध अवैध नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट
- 2 दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड का पुनर्गठन
- 3 जनगणना 2027 कराने की योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी
- 4 राष्ट्रीय लोक अदालत ने किया 2.59 करोड़ से अधिक मामलों का निपटान
- 5 राज्य बार काउंसिलों में 30% महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
- 6 संविधान का संथाली भाषा में अनुवाद जारी
- 7 डिजिटल अरेस्ट मामलों की सीबीआई जांच के निर्देश
- 8 भारतीय थल सेना के रूपांतरण हेतु रोडमैप
- 9 अवैध घुसपैठियों के कोई वैधानिक अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- 10 बाल तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
- 1 फेक न्यूज़ पर अंकुश लगाने के तंत्र की समीक्षा
- 2 अंतर-राज्यीय परिषद का पुनर्गठन
- 3 74वें संविधान संशोधन के कार्यान्वयन पर निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट
- 4 उ. प्र. मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम की संवैधानिक वैधता बरकरार
- 5 सभी निजी संपत्तियां 'समुदाय के भौतिक संसाधनों' का हिस्सा नहीं
- 6 PMLA के तहत लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक
- 7 अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
- 8 दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता एक मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
- 9 भारत में 'एडाप्टिव डिफेंस' की आवश्यकता

