भारत में प्राथमिक शिक्षाप्रवृत्तियां एवं चुनौतियां
डॉ- अमरजीत भार्गव
- 21वीं सदी के प्रथम दशक में सार्वभौमिक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के अनेक प्रयास किए गए_ इसी संदर्भ में भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि एक दशक के अंदर ही 96%से अधिक बच्चों का (6 से 14 वर्ष की आयु के) स्कूलों में नामांकन हो गया। हालांकि शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की शिक्षण पद्धति में सुधार तथा अवसंरचनात्मक संसाधनों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप सार्वभौमिक शिक्षा तक पहुंच के व्यावहारिक लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच सके।
- हाल ही में गैर सरकारी संस्था ‘प्रथम’ ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 नाभिकीय ऊर्जा: भारत के विकास-पथ की रणनीतिक कुंजी
- 2 भारत का पर्यावरणीय न्यायशास्त्र संरक्षण एवं विकास के मध्य संतुलन - नूपुर जोशी
- 3 भारत का विकासमान श्रम पारितंत्र सामाजिक सुरक्षा परिप्रेक्ष्य - नूपुर जोशी
- 4 वैश्विक जलवायु शासन का पुनर्मूल्यांकन कॉप-30 एवं सतत भविष्य की दिशा - आलोक सिंह
- 5 सतत भविष्य के लिए वन संतुलन, संरक्षण एवं समुचित प्रबंधन की अनिवार्यताएं - नूपुर जोशी
- 6 संयुक्त राष्ट्र @80 सुधार, प्रतिनिधित्व एवं बदलती विश्व-व्यवस्था की चुनौतियां - आलोक सिंह
- 7 भारत की पाण्डुलिपि धरोहर प्राचीन ज्ञान का अमूल्य भंडार - संपादकीय डेस्क
- 8 ब्लू इकॉनमी व सतत समुद्री प्रगति भारत का दृष्टिकोण एवं रणनीति - आलोक सिंह
- 9 सतत मृदा प्रबंधन खाद्य सुरक्षा, जलवायु और जीवन का आधार - आलोक सिंह
- 10 माइक्रोप्लास्टिक संकट : मानव स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिक तंत्र के लिए अदृश्य खतरा

